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संवत और उनके प्रकार

संवत और उनके प्रकार : नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका Historywithsharmaji में, आज हम अध्ययन करेंगे संवत और उनके प्रकार के बारे में

संवत और उनके प्रकार




संवत और उनके प्रकार: प्राचीन भारतीय महर्षियो ने समय के व्यापक मापन के लिए संवत शब्द का प्रयोग किया। प्राचीन भारतीय लेखों में उल्लिखित अधिकांश तिथियां किसी न किसी संवत से संबद्ध है। संवत का प्रयोग किसी समय विशेष की गणना करने के लिए की गई है।


संवत के प्रकार: मुख्यत: हमें प्राचीन भारत के इतिहास में निम्नलिखित संवतो के प्रचलन का ज्ञान मिलता है:- 


 1. विक्रम संवत

 2. शक संवत

 3. गुप्त संवत

4. बलभी संवत

 5.हर्ष संवत

 6.कल्चुरी चेदी संवत


1.विक्रम संवत:


  • इसे कृत संवत या मालव संवत के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसके विषय में हमें मुख्यतः चयन स्रोतों से जानकारी प्राप्त होती है।
  • जैन ग्रंथ में महावीर के निर्वाण तथा विक्रम संवत के बीच 470 वर्षों का अंतर बताया गया है। महावीर के निर्माण तिथि 527 ईसा पूर्व मानी जाती है । तद्नुसार विक्रम संवत के प्रारंभ की तिथि 527 - 470 = 57 ईसा पूर्व निर्धारित होती है। 
  • जैन ग्रंथ इसे मालवा के शासक विक्रमादित्य से संबंधित करते हैं जिसने 57 ईसा पूर्व में शकों को पराजित करने के उपलक्ष में इसे परिवर्तित किया था। इस प्रकार विक्रम संवत का संस्थापक चंद्रगुप्तविक्रमादित्य को माना जाता है।
  • चंद्रगुप्त विक्रमादित्य का शासन सतयुग के समान सुख एवं समृद्ध से भरा हुआ था अतः इस संवत को कृत संवत कहा गया।
  • चूकी चंद्रगुप्त विक्रमादित्य मालवा से संबंधित थे इसलिए इस संवत को मालव संवत भी कहा गया।
  • मालवा के लेखो में इसी संबंध का प्रयोग मिलता है।
  • देश के अन्य भागों में आज भी इस संबंध का प्रयोग किया जाता है।


2. शक संवत :


  •  जैन ग्रंथो के अनुसार चंद्रगुप्त विक्रमादित्य(57 ईसा पूर्व)के उत्तराधिकारी को उसके 135 वे वर्ष में शकों ने पराजित कर उसके राज्य पर अधिकार कर लिया इस विजय के उपलक्ष्य में उन्होंने अपना संवत चलाया जिसे शक संवत कहा जाता है।
  • इस प्रकार शक संवत की प्रारंभिक तिथि 135 - 57=78 ईस्वी भी निकलती है।
  • इस संवत का प्रवर्तक कुषाण शासन कनिष्क को माना जाता है।
  • भारतीय परंपरा में कनिष्क संवत को शक संवत का नाम प्रदान किया गय
  • शक संवत ही भारत का राष्ट्रीय संवत है।


3. गुप्त संवत 


  • इस संवत का विकास गुप्त शासकों ने किया।
  • गुप्त शासकों के सामंत के लेखों में गुप्त संवत का प्रयोग मिलता है।
  • इस संवत को गुप्त प्रकाल नाम भी दिया गया है।
  • इसकी स्थापना गुप्त वंश के तीसरे शासक चंद्रगुप्त प्रथम ने 319 ईस्वी में की थी।



 4.बल्लभी संवत 


  • इस संवत की सूचना अलबरूनी के विवरण से प्राप्त होती है।
  • इसकी स्थापना 319 ईस्वी में बल्लभ नामक राजा ने की थी।
  • गुप्त संवत और बल्लभी संवत का समय एक ही प्रतीत होता है। ऐसा प्रतीत होता है कि गुप्त वंश के पतन के पश्चात के बल्लभी के राजाओं ने इस संवत का नाम बदलकर के बल्लभी संवत रख दिया था।



5. हर्ष संवत :


  • इस संवत का संबंध वर्धन वंश के शासक हर्षवर्धन से है।
  • हर्ष के लेखों में राज्यारोहण की तिथि 606 ईस्वी है। अतः हर्ष संवत का प्रारंभ 606 ईस्वी में हुआ।
  • कालांतर में इस संवत का स्थान विक्रम संवत ने ले लिया।


6. कलचूरी चेदी संवत:

 

  • इसकी स्थापना 248 से 249 ईस्वी की लगभग पश्चिमी भारत के अभी नरेश ईश्वर सेन द्वारा की गई थी।
  • मध्यप्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के कल्चुरी शासकोंने अपने लेखों में इसी संवत का प्रयोग किया था।

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