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Regulating Act/रेगुलेटिंग एक्ट

Regulating Act/रेगुलेटिंग एक्ट:




नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका historywithsharmaji blog में। इस आर्टिकल मे दोस्तों हम आधुनिक भारत के इतिहास के एक महत्वपूर्ण टॉपिक रेगुलेटिंग एक्ट के बारे मे अध्ययन करेंगे:

रेगुलेटिंग एक्ट








Regulating Act/रेगुलेटिंग एक्ट:


 : इस अधिनियम का भारत के संवैधानिक इतिहास के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियमित और नियंत्रित करने की दिशा में ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाया गया यह पहला कदम था। यह अधिनियम सन 1773 ईस्वी में ब्रिटिश सरकार द्वारा पारित हुआ था।



रेगुलेटिंग एक्ट का महत्व: 


1.   भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियमित एवं नियंत्रित करने की दिशा में ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाया गया यह पहला कदम था। 


2.     इसके द्वारा पहली बार कंपनी के राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यों को ब्रिटिश सरकार की मान्यता मिली। 


3.     रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा भारत में ब्रिटिश सरकार द्वारा केंद्रीय प्रशासन की नींव डाली गई।


4.     यह पहली बार था जब ब्रिटिश सरकार को कंपनी की राजनीतिक और प्रशासनिक के कार्यों की अनुभूति हुई थी। 


रेगुलेटिंग एक्ट की विशेषताएं:


1.  इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर का पद नाम बदलकर के बंगाल का गवर्नर जनरल कर दिया गया। लार्ड वारेन हेस्टिंग्स बंगाल के प्रथम गवर्नर जनरल थे। 

2.    गवर्नर जनरल की सहायता के लिए चार सदस्यों की एक समिति का गठन किया गया जिसे कार्यकारी परिषद का नाम दिया गया। 

3.     इस अधिनियम के द्वारा मद्रास और मुंबई के गवर्नर को बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया। इस अधिनियम के पारित होने से पहले सभी प्रेसीडेंसीयों के गवर्नर अलग-अलग होते थे। 

4.    रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा 1774 ईस्वी में कोलकाता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश थे। सर एलिजा इपे सुप्रीम कोर्ट के प्रथम मुख्य न्यायाधीश थे। 

5.    रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा कंपनी के अधिकारियों का निजी व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया गया। 

6.    इस अधिनियम के द्वारा कंपनी के अधिकारियों का भारतीय लोगों से रिश्वत लेना एवं उपहार लेना मना कर दिया गया। 

7.    ब्रिटिश सरकार को राजस्व सैनिक एवं नागरिक के कामकाज की सूचना देने के लिए एक कोर्ट आफ डायरेक्टर्स अर्थात निदेशक मंडल की स्थापना की गई। इस प्रकार से भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के ऊपर ब्रिटिश सरकार का पकड़ मजबूत हो गया।

8.  भारत के संवैधानिक विकास के इतिहास में इस अधिनियम का अत्यंत विशिष्ट महत्वपूर्ण योगदान है।


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