जैन धर्म के तीर्थंकर और उनके प्रतीक:
नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका historywithsharmaji blog में। इस आर्टिकल मे दोस्तों हम भारत के छठी शताब्दी ईशा पूर्व के महत्वपूर्ण धर्म जैन धर्म के 24 तीर्थंकरो और उनके प्रतीकों का अध्ययन करेंगे:
जैन धर्म के तीर्थंकर : जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान वर्धमान महावीर को माना जाता है। जैन शब्द का शाब्दिक अर्थ जिन होता है जिसका मतलब विजेता होता है।
जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए है जिनमें पहले तीर्थंकर ऋषभ देव थे।
जैन धर्म के 23 वे तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे जिनका जन्म वाराणसी में हुआ था।
जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर वर्धमान महावीर को माना जाता है। वर्धमान महावीर का जन्म कुंडग्राम वैशाली में हुआ था। वर्धमान महावीर गौतम बुद्ध के समकालीन थे।
जैन धर्म बौद्ध धर्म से पुराना धर्म है। आइए दोस्तों हम जैन धर्म के 24 तीर्थंकरो के प्रतीक का अध्ययन करते है:
क्रम तीर्थंकर प्रतीक
1. ऋषभदेव वृषभ
2 . अजीतनाथ गज
3. संभवनाथ। अश्व
4. अभिनंदन नाथ। कपि
5. सुमति नाथ। क्रौंच
6. पदमप्रभु। पदम
7. सुपार्श्वनाथ स्वास्तिक
8. चंद्रप्रभु चंद्र
9. सुविधिनाथ मकर
10. शीतलनाथ। श्रीवत्स
11. श्रेयांसनाथ गैंडा
12. वासुपूज्य महिषी
13. विमलनाथ वराह
14 . अनंतनाथ श्येन
15. धर्मनाथ वज्र
16. शांतिनाथ मृग
17. कुंथुनाथ अज
18. आरनाथ मीन
19. मल्लिननाथ कलश
20 . मुनिसुवरत कूर्म
21. नेमीनाथ नीलोतपल
22. अरिस्थिनेमी शंख
23. पार्श्वनाथ सर्पफन
24. महावीर सिंह
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