शुंग वंश
शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने 185 ईसा पूर्व में की थी। उन्होंने अंतिम मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या करके सत्ता पर अधिकार कर लिया। शुंग वंश का शासन लगभग 185 ईसा पूर्व से 75 ईसा पूर्व तक चला।
प्रमुख तथ्य:
1. पुष्यमित्र शुंग:
शुंग वंश का संस्थापक था।
उसने दो बार यवन आक्रमणकारियों को पराजित किया।
पुष्यमित्र ने 2 अश्वमेध यज्ञ करवाया।
2. अग्निमित्र शुंग:
पुष्यमित्र का पुत्र और उत्तराधिकारी।
कालिदास के नाटक "मालविकाग्निमित्रम्" में उसका उल्लेख मिलता है।
3. धार्मिक योगदान:
शुंग शासक वैदिक धर्म के संरक्षक थे।
बौद्ध धर्म के प्रति उनके शासनकाल में प्रतिरोध भी देखा गया।
4. कला और संस्कृति:
इस काल में सांची स्तूप का विस्तार हुआ।
भारहुत स्तूप का निर्माण इसी युग में हुआ।
5. पतन:
अंतिम शुंग राजा देवभूति था, जिसे उसके मंत्री वसुदेव कण्व ने पराजित कर कण्व वंश की स्थापना की।
महत्व:
शुंग वंश ने मौर्य साम्राज्य के बाद भारत में सांस्कृतिक और धार्मिक पुनरुत्थान की नींव रखी। उन्होंने वैदिक परंपराओं को पुनर्जीवित किया और विदेशी आक्रमणों से देश की रक्षा की।
1 Reviews:
Click here for ReviewsVery good