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अशोक के 14 शिलालेख

अशोक के 14 शिलालेख : 

नमस्कार दोस्तों स्वागतहै आपका Historywithsharmaji में, दोस्तों आज हम अध्ययन करेंगे अशोक महान द्वारा स्थापित 14 शिलालेखो के बारे में:


अशोक के 14 शिलालेख



अशोक के 14 शिलालेख :


अशोक के 14 शिलालेख या धम्म लेख उनके शासनकाल के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जो उन्होंने बौद्ध धर्म के सिद्धांतों और नैतिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न स्थानों पर उकेरवाए थे। ये शिलालेख मुख्य रूप से प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं और भारत के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाते हैं। इन शिलालेखों का उद्देश्य लोगों को धर्म और नैतिकता का पालन करने के लिए प्रेरित करना था। यहाँ पर अशोक के 14 प्रमुख शिलालेखों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया है:


शिलालेख 1


विषय: मांसाहार और हिंसा पर रोक


इस शिलालेख में अशोक ने लोगों को मांसाहार, बलि प्रथा और जानवरों की हत्या से दूर रहने का संदेश दिया है। उन्होंने अपने साम्राज्यj में जानवरों के शिकार और मांस के उपयोग को कम करने की अपील की है।


शिलालेख 2


विषय: चिकित्सा और कल्याण


इसमें मानव और पशुओं के लिए अस्पतालों और औषधियों की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, सड़कों और जलाशयों के निर्माण को भी प्रोत्साहित किया गया है ताकि लोगों को सुविधा हो।


शिलालेख 3


विषय: राज्य अधिकारियों की शिक्षा


इसमें अधिकारियों को हर पांच साल में लोगों के नैतिक और धार्मिक उत्थान के लिए शिक्षा देने का आदेश दिया गया है। अशोक चाहते थे कि उनके अधिकारी धर्म का पालन करें और लोगों के बीच नैतिकता का प्रचार करें।


शिलालेख 4


विषय: धम्म नीति का प्रचार


इस शिलालेख में अशोक ने अपने धम्म नीति का प्रचार करने का आदेश दिया। उन्होंने बताया कि उनका शासन न केवल जीत के लिए है, बल्कि धर्म के प्रसार के लिए भी है।


शिलालेख 5


विषय: धर्ममहामात्रों की नियुक्ति


इसमें बताया गया है कि अशोक ने "धर्ममहामात्रों" की नियुक्ति की थी, जो लोगों के नैतिक और धार्मिक विकास को बढ़ावा देते थे। ये धर्ममहामात्र विभिन्न समुदायों, जैसे कि ब्राह्मण, श्रमण, यवन आदि में धम्म का प्रचार करते थे।


शिलालेख 6


विषय: अशोक का संदेश


अशोक ने अपने शासकों और अधिकारियों को आदेश दिया कि वे धर्म का प्रचार करें और अपने क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने यह भी आदेश दिया कि उनके संदेश को आम जनता तक पहुँचाया जाए।


शिलालेख 7


विषय: धार्मिक सहिष्णुता


इस शिलालेख में धार्मिक सहिष्णुता की बात की गई है। अशोक ने सभी धर्मों के प्रति सम्मान और सहिष्णुता का आह्वान किया, ताकि लोग अपने-अपने धर्म का पालन स्वतंत्रता से कर सकें।


शिलालेख 8


विषय: धम्म यात्रा


इसमें अशोक के अपने जीवन में परिवर्तन का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि पहले वह विजय यात्रा पर जाते थे, लेकिन अब वह धार्मिक यात्रा (धम्म यात्रा) पर जाते हैं ताकि लोगों को नैतिकता और धर्म की शिक्षा दे सकें।


शिलालेख 9


विषय: व्यर्थ धार्मिक अनुष्ठानों की आलोचना


अशोक ने उन धार्मिक अनुष्ठानों और प्रथाओं की आलोचना की जो केवल दिखावे के लिए की जाती थीं। उन्होंने इन्हें व्यर्थ माना और लोगों को वास्तविक नैतिकता और धर्म के पालन का संदेश दिया।


शिलालेख 10


विषय: यश और कीर्ति के स्थान पर धर्म का प्रचार


अशोक ने शाही यश और कीर्ति की बजाय धर्म को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। उनका मानना था कि यश की बजाय धर्म का पालन मनुष्य को सच्ची शांति और खुशी देता है।


शिलालेख 11


विषय: धम्म का महत्व


अशोक ने बताया कि धम्म (धर्म) का पालन ही सर्वोत्तम कार्य है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करना, दूसरों की सेवा करना, और सच्चाई का पालन करना ही धम्म है।


शिलालेख 12


विषय: धार्मिक सहिष्णुता का पुनः उल्लेख


अशोक ने सभी धार्मिक समुदायों को एक-दूसरे का सम्मान करने का संदेश दिया। उन्होंने धार्मिक भेदभाव को समाप्त करने और सहिष्णुता को अपनाने की बात कही।


शिलालेख 13


विषय: कलिंग युद्ध और धम्म विजय


अशोक के सबसे प्रसिद्ध शिलालेखों में से एक यह है, जिसमें उन्होंने कलिंग युद्ध के बाद हुए अपने हृदय परिवर्तन का वर्णन किया। उन्होंने स्वीकार किया कि युद्ध में हुई हिंसा और विनाश को देखकर उनका मन बदल गया और उन्होंने अहिंसा, करुणा और धर्म को अपनाने का निर्णय लिया। इस शिलालेख में उन्होंने अपनी धम्म विजय (धर्म की विजय) का प्रचार किया है, न कि सैन्य विजय का।


शिलालेख 14


विषय: शिलालेखों का संक्षिप्त विवरण


यह शिलालेख अशोक के शिलालेखों के उद्देश्य को स्पष्ट करता है। इसमें बताया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के शिलालेख लि

खवाए गए हैं और सभी का उद्देश्य जनता को धर्म का पालन करने के लिए प्रेरित करना है।


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