अभिलेख एवं उनसे संबंधित विशिष्ट तथ्य : नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका Historywithsharmaji blog में, आज हम अध्ययन करेंगे प्राचीन इतिहास को जानने के लिए उपलब्ध स्रोतों के बारे में :
अभिलेख : अभिलेखों के अध्ययन को पुरालेख शास्त्र कहा जाता है। भारत में अधिकतर अभिलेख मंदिर के दीवारों, ताम्रपत्रों, शैल चट्टानों इत्यादि पर मिलते हैं।
भारत में अभिलेख सर्वोत्तम प्राकृत भाषा में उसके पश्चात संस्कृत भाषा में उसके पश्चात क्षेत्रीय भाषाओं में लिखा जाने लगा।
- अभिलेखों के द्वारा हमें तत्कालीन समय का आर्थिक राजनीतिक सामाजिक इत्यादि जानकारी मिलती है।
- भारत में सर्वाधिक अभिलेख मैसूर संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए हैं।
अभिलेखों में प्रमुखता कर लिपियों का प्रयोग किया गया है जो निम्नलिखित है:-
- प्राकृत
- खरोष्ठी
- ब्राह्मी
- अरामेइक
- यूनानी
1837 ईस्वी में सर्वप्रथम प्रसिद्ध इंग्लैंड वैज्ञानिक जेम्स प्रिंसेप ने अशोक के अभिलेखों की भाषाओं को पढ़ा और समझा।
सर्वाधिक प्राचीन अभिलेख मध्य एशिया के बोगाजकोई के नामक स्थान से मिला है जिस पर इंद्र, वरुण, मित्र इत्यादि देवताओं की जानकारी मिलती है।
प्रमुख अभिलेख एवं उनसे संबंधित शासक :
प्रयाग प्रशस्ति : समुद्रगुप्त
जूनागढ़ अभिलेख: शक क्षत्रप रुद्र दमन
भीतरी स्तंभ लेख : स्कंद गुप्त
हाथी गुफा अभिलेख : खारवेल
एहोलअभिलेख : पुलकेशिन द्वितीय
ग्वालियर अभिलेख : राजा भोज
देवपाडा अभिलेख : विजय सेन
मधुबन एवं बांसखेड़ा अभिलेख : हर्षवर्धन
मंदसौर अभिलेख : यशोबर्मन
नासिक अभिलेख : गौतमी बल श्री
एरण अभिलेख : भानु गुप्त
पुना तामपत्र अभिलेख : प्रभावती गुप्ता
अभिलेखों से संबंधित विशिष्ट तथ्य :
१. रुद्र दमन का जूनागढ़ अभिलेख संस्कृत भाषा का पहला अभिलेख माना जाता है।
२. पुलकेशिन द्वितीय का ऐहोल अभिलेख उसके दरबारी कवि रवि कीर्ति द्वारा लिखा गया है।
३. समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति की रचना उसके सचिव हरीषेन द्वारा की गई है।
४. भानु गुप्त के एरन अभिलेख में सर्वप्रथम सती प्रथा का साक्ष्य मिलता है।
५. स्कंद गुप्त के भीतरी अभिलेख के द्वारा हुणो के आक्रमण का वर्णन मिलता है।
६. दिल्ली के मेहरौली लोह स्तंभ में चंद्रगुप्त
के विजयों का वर्णन मिलता है।
