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इलाहाबाद की संधि 1765 | Treaty of Allahabad in Hindi

 इलाहाबाद की संधि 1765 | Treaty of Allahabad in Hindi

इलाहाबाद की संधि 1765 | Treaty of Allhabad in Hindi



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📚 अनुक्रमणिका (Table of Contents)

1. परिचय

2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

3. इलाहाबाद की संधि कब और किनके बीच हुई?

4. संधि की प्रमुख शर्तें

5. इलाहाबाद की संधि का महत्व

6. परिणाम और प्रभाव

7. UPSC के लिए प्रासंगिक तथ्य

8. निष्कर्ष



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🔰 परिचय :


1765 ईस्वी में राबर्ट क्लाइव बंगाल के गवर्नर के रूप में पुनः वापस आया । बंगाल आते ही वह एक बार फिर से अंग्रेजों को भारत में शक्तिशाली बनाने के प्रयास में लग गया।इलाहाबाद की संधि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय के बीच 12 अगस्त, 1765 को हुई थी। यह संधि बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी अधिकारों की स्वीकृति को लेकर थी। इस संधि ने भारत में अंग्रेजों की प्रशासनिक सत्ता की नींव रखी।



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🏹 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि :


बक्सर का युद्ध (1764) में अंग्रेजों ने एकत्रित भारतीय सेना (मीर कासिम, शाह आलम द्वितीय, और अवध के नवाब शुजाउद्दौला) को हराया।


यह विजय कंपनी के लिए निर्णायक थी, जिसने उसे राजनीतिक रूप से भी भारत में मजबूती दी।


युद्ध के बाद, सभी पराजित शासकों को संधि के लिए बाध्य किया गया।




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🤝 इलाहाबाद की संधि कब और किनके बीच हुई?


पक्ष                   विवरण


तिथि                12 अगस्त 1765

स्थान                इलाहाबाद

संधिपक्ष            1. ईस्ट इंडिया कंपनी  2. मुग़ल सम्राट शाह                          आलम द्वितीय  3. अवध के नवाब            शुजाउद्दौला

हस्ताक्षरकर्ता       रॉबर्ट क्लाइव (कंपनी की ओर से)




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📜 संधि की प्रमुख शर्तें:


1. शाह आलम द्वितीय और कंपनी के बीच शर्तें:


शाह आलम द्वितीय ने कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी (राजस्व संग्रह) के अधिकार दिए।


बदले में कंपनी ने उन्हें प्रतिवर्ष 26 लाख रुपये का भुगतान करने का वादा किया।


शाह आलम द्वितीय को अवध क्षेत्र में इलाहाबाद और कड़ा वापस दिए गए।



2. अवध के नवाब और कंपनी के बीच शर्तें:


नवाब शुजाउद्दौला को बक्सर की पराजय के लिए 50 लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ा।


अवध को कंपनी के अधीन नहीं किया गया, बल्कि बफर स्टेट (Buffer State) के रूप में रखा गया।




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🌟 इलाहाबाद की संधि का महत्व:


1. ब्रिटिश सत्ता की शुरुआत: यह संधि भारत में ब्रिटिश शासन के प्रशासनिक रूप की शुरुआत थी।



2. दीवानी अधिकार प्राप्ति: कंपनी अब सीधे राजस्व संग्रह करने लगी जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।



3. नाममात्र सम्राट: मुग़ल सम्राट अब केवल नाम के शासक रह गए; वास्तविक सत्ता कंपनी के पास आ गई।



4. रॉबर्ट क्लाइव की वापसी: रॉबर्ट क्लाइव दूसरी बार भारत आए और इस संधि को संपन्न कराया।





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🎯 परिणाम और प्रभाव :


1. राजनीतिक मुग़ल सम्राट की शक्ति समाप्त, कंपनी की वैधानिक सत्ता की शुरुआत

2. आर्थिक कंपनी को राजस्व संग्रह का अधिकार मिला, अंग्रेजों की आय में तीव्र वृद्धि

3. प्रशासनिक कंपनी अब शासक की भूमिका में आई, प्रशासनिक संरचना विकसित हुई

4. सैन्य नवाब अवध कमजोर हुआ लेकिन बचा रहा ताकि मराठों से एक सीमा बनी रहे




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📘 UPSC के लिए प्रासंगिक तथ्य :


बिंदु                विवरण


तिथि                              12 अगस्त 1765

हस्ताक्षरकर्ता                   रॉबर्ट क्लाइव

दीवानी अधिकार मिले       बंगाल, बिहार, उड़ीसा

युद्ध जिसकी परिणति थी    बक्सर का युद्ध (1764)

संधि से लाभान्वित            ईस्ट इंडिया कंपनी (सबसे ज्यादा)




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🔚 निष्कर्ष :


इलाहाबाद की संधि 1765 भारतीय उपमहाद्वीप में ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता की औपचारिक शुरुआत थी। यह संधि न केवल अंग्रेजों की आर्थिक शक्ति को बढ़ाती है, बल्कि भारत में उनके प्रशासनिक वर्चस्व को भी स्थापित करती है। UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में यह संधि एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है। वास्तव में इलाहाबाद की संधि ही भारत में अंग्रेजी शासन की शुरुआत मानी जा सकती है।



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